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New Center of Excellence for Made-in-India Medical Devices

नई दिल्ली, 05 नवंबर: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) ने विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का निर्णय किया है, जिसके अंतर्गत चिकित्सा उपकरण और निदान क्षेत्र से संबंधित मेक-इन-इंडिया उत्पादों के विकास एवं उनके व्यावसायीकरण को सुनिश्चित किया जाएगा।

ICMR at IITs

आईसीएमआर-डीएचआर ने अपने फ्लैगशिप इनिशिएटिव मेडिकल डिवाइस ऐंड डायग्नोस्टिक्स मिशन सचिवालय (एमडीएमएस) के तहत मिशन मोड में मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक्स इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की इस पहल का नाम है-“आईआईटी में आईसीएमआर (ICMR at IITs)”। इसमें शामिल विषयगत क्षेत्रों को कुछ इस तरह रणनीतिक रूप से डिजाइन किया गया है, जिससे इन उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित उत्पाद/प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत और भारत सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

आईसीएमआर-डीएचआर उत्कृष्टता केंद्र अब तक छह आईआईटी संस्थानों में आरंभ हो चुके हैं, जिनमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी कानपुर, आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी मद्रास शामिल हैं।

आईआईटी में आईसीएमआर की स्थापना (Establishment of ICMR in IITs)

इस संबंध में आईसीएमआर द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि “आईआईटी में आईसीएमआर” की स्थापना व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव के लिए प्रौद्योगिकी विकास और व्यावसायीकरण चक्र में अंतर को पाटने का काम करेगी। भारत में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र का मूल्य वर्तमान में 7-8 बिलियन डॉलर है और अनुमानों के अनुसार वर्ष 2025 तक बढ़कर इसके 50 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।

आईसीएमआर मुख्यालय में स्थापित महत्वाकांक्षी चिकित्सा उपकरण और निदान मिशन सचिवालय के तहत आईआईटी में आईसीएमआरकी स्थापना से मदद मिलेगी।

आईआईटी के साथ साझेदारी से मजबूत एवं अत्याधुनिक, ‘मेक इन इंडिया’ मेडिकल उपकरणों और डायग्नोस्टिक्स के विकास को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। ये उत्कृष्टता केंद्र चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग करेंगे ताकि उनके व्यापक उपयोग के लिए आवश्यक सस्ते और समावेशी स्वास्थ्य सेवा समाधान विकसित किये जा सकें। वर्तमान में, भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र अपनी जरूरतों के लिए लगभग 80% चिकित्सा उपकरणों का आयात करता है।

प्रोफेसर बलराम भार्गव, सचिव, डीएचआर और महानिदेशक, आईसीएमआर ने औपचारिक रूप से नई दिल्ली में आईसीएमआर मुख्यालय में आईआईटी के निदेशकों और डीन को संबोधित किया और इस पहल के लिए आईसीएमआर के समर्थन और प्रतिबद्धता की पेशकश की। आईआईटी संस्थानों में आईसीएमआर-डीएचआर उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं स्टार्ट-अप तैयार करेगी और भारत में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित तथा प्रेरित करने के साथ-साथ और व्यावसायीकरण के करीब पहुँच चुकी प्रौद्योगिकियों/उत्पादों को समग्र समर्थन प्रदान करेगी।

भारत में उपलब्ध अधिकांश चिकित्सा उपकरण किफायती नहीं हैं, इस योजना के पीछे का सिद्धांत “ग्लोबल अफोर्डेबल नीड ड्रिवेन हेल्थकेयर इनोवेशन” (गांधी) को व्यापक उत्पाद पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विकसित करना है। भारतीय आबादी के मध्यम और निम्न आय वर्ग तक सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में सुधार पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

परिषद आयात प्रतिस्थापन द्वारा आर्थिक विकास में योगदान के कार्यक्रम के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगी। उद्योगों की भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी में इन प्रौद्योगिकियों के उत्पादन को बढ़ाने और व्यावसायीकरण के लिए भी तैयारी की जा रही है।

(इंडिया साइंस वायर)

Topics: ICMR, DHR, MoH&FW, IIT, Medical Device, Diagnostics, Innovation, Product Development, MDMS, Centres of Excellence, CoE, Make-in-India

By Editor

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